पुणे न्यूज डेस्क: पुणे के पिंपरखेड़ गांव में तेंदुए का आतंक लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक महीने में ही तेंदुए ने तीन लोगों की जान ले ली — एक 5 साल की बच्ची, एक 82 साल की बुजुर्ग महिला और एक 13 साल का लड़का। ग्रामीण सुरक्षा के लिए अपने गले में स्पाइक वाले कॉलर पहन रहे हैं ताकि तेंदुए के हमले से बचा जा सके। वहीं, घरों के चारों ओर बिजली की तारें और लोहे की ग्रिलें लगाई गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की लगातार मौजूदगी और हाल ही में हुए हमलों ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को खतरनाक बना दिया है। खेतों में काम करने वाले अब ग्रुप में जाते हैं और स्कूल के समय पर भी विचार किया जा रहा है। विट्ठल रंगनाथ जाधव ने बताया कि खेती ही उनकी कमाई का मुख्य जरिया है, लेकिन तेंदुए के डर के कारण उन्हें हर दिन सुरक्षा उपाय अपनाने पड़ रहे हैं।
अधिकारियों ने तेंदुए को पकड़ने के लिए कैमरा ट्रैप और थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल किया। तेंदुआ घटनास्थल से 400-500 मीटर दूर देखा गया। सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों की देखरेख में स्थानीय लोगों की मदद से तेंदुए को पकड़ा गया और उसकी लाश पोस्टमॉर्टम के लिए मानिकदोह लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर भेजी गई।
ग्रामीणों ने सरकार से इस मामले में तुरंत कार्रवाई की अपील की है, ताकि भविष्य में कोई और जान का नुकसान न हो। सुरक्षा उपायों और सतर्कता के बावजूद लोग तेंदुए के आतंक से भयभीत हैं और हर दिन अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।